Ranchi
रांची के धुर्वा डैम में शुक्रवार देर रात एक बड़ा हादसा हो गया, जिसमें जमशेदपुर से आए दो जजों के साथ मौजूद उनके स्टाफ के चार लोग पानी में डूब गए। इनमें तीन—बाडीगार्ड उपेंद्र सिंह, रोबिन कुजूर और चालक अनिल सिंह—के शव बरामद कर लिए गए हैं, जबकि चालक सत्येंद्र सिंह अब तक लापता है। उसकी तलाश लगातार जारी है।
घटना उस समय हुई जब चारों कर्मचारी रात करीब 11 बजे गेस्ट हाउस से अपनी कार लेकर धुर्वा डैम घूमने पहुंचे। डैम के मुख्य फाटक के पास अत्यधिक अंधेरा था। स्थानीय लोगों के मुताबिक यहां लगी सोलर लाइट कई दिनों से खराब थी, जिससे रात में बिल्कुल रोशनी नहीं रहती।
अंधेरे में कार चालक अनिल सिंह ने नियंत्रण खो दिया और वाहन सीधे डैम के गहरे पानी में जा गिरा। कार गिरते ही चारों उसमें फंस गए। गहराई और तेज दबाव की वजह से तीन लोग बाहर नहीं निकल सके और कार के भीतर ही दम घुटने से उनकी मौत हो गई।
डैम के पास मौजूद लोगों ने अचानक पानी के भीतर कार की लाइट टिमटिमाती देखी और पुलिस को सूचना दी। धुर्वा थाना पुलिस, सीठीओ क्षेत्र के गोताखोर और कुछ देर बाद एनडीआरएफ की टीम मौके पर पहुंची। घंटों की मशक्कत के बाद तीन शवों को कार के अंदर से बाहर निकाला गया।
चालक सत्येंद्र सिंह कार में नहीं मिला। अनुमान है कि कार पानी में गिरते ही वह बाहर निकलने की कोशिश में उफनते पानी में कूद गया होगा और डूब गया। शनिवार शाम तक खोज अभियान चलाया गया, लेकिन सफलता नहीं मिली। एनडीआरएफ रविवार सुबह फिर तलाशी शुरू करेगी।
मृतक सभी जमशेदपुर के जगसुलाई इलाके के रहने वाले थे, जबकि रोबिन कुजूर का पैतृक घर बिहार के टेकारी में है। घटना की सूचना मिलते ही उनके घरों में मातम छा गया। सत्येंद्र सिंह के परिजन उसका शव मिलने तक डैम के किनारे ही डटे रहे।
पुलिस जांच में मालूम हुआ कि दोनों बाडीगार्ड पीछे बैठे थे और दोनों चालक आगे। कार से दोनों बाडीगार्ड के सरकारी हथियार भी मिले। हादसे की खबर मिलते ही जज, पुलिस अधिकारी और न्यायालय कर्मी बड़ी संख्या में डैम पहुंचे। नगड़ी थाना में प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।
स्थानीय लोगों ने बताया कि धुर्वा डैम में सुरक्षा इंतजाम बेहद कमजोर हैं। लंबे समय से यहां कोई स्ट्रीट लाइट नहीं है और शिकायतों के बावजूद सोलर लाइट की मरम्मत नहीं कराई गई। लोगों का कहना है कि यदि adequate रोशनी होती तो शायद यह हादसा टल सकता था।
तीनों शवों का पोस्टमार्टम कर परिजनों को सौंप दिया गया है। चारों कर्मचारी अपने काम से फुर्सत मिलने के बाद सिर्फ थोड़ी देर टहलने निकले थे, लेकिन यह सफर उनके लिए जानलेवा साबित हुआ।
यह घटना प्रशासनिक लापरवाही पर गंभीर सवाल खड़ी करती है। डैम जैसी जगह पर रात में सुरक्षा व्यवस्था का न होना चिंता की बात है। हादसे ने चार परिवारों को हमेशा के लिए शोक में डुबो दिया है, जबकि शहर भर में इस त्रासदी को लेकर गहरी स्तब्धता है।
