Jamtara/Ranchi
मांझी परगाना सरदार महासभा, संताल परगना प्रमंडल के दस सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने संतोष गंगवार से रांची स्थित लोकभवन में मुलाकात कर पेसा नियमावली 2025 और क्षेत्रीय पारंपरिक कानूनों को लेकर विस्तृत ज्ञापन सौंपा।
प्रतिनिधिमंडल ने पंचायत उपबंध (अनुसूचित क्षेत्रों पर विस्तार) झारखंड नियमावली 2025 के अध्याय 1, 2, 7 और 8 में कथित अस्पष्टताओं की ओर ध्यान दिलाया। साथ ही अध्याय 15 को अधिक सशक्त बनाने की आवश्यकता पर बल दिया। महासभा का कहना था कि नियमावली का क्रियान्वयन पेसा अधिनियम 1996 की मूल भावना के अनुरूप होना चाहिए।
महासभा ने मांग की कि जिला सर्वेक्षण रिपोर्ट (बालू) के आधार पर पाँचवीं अनुसूची क्षेत्र के सभी श्रेणी के बालू घाटों का संचालन ग्राम सभाओं को सौंपा जाए। ग्रामसभा को पंचायत ढांचे से अलग रखते हुए निर्वाचित प्रतिनिधियों एवं पंचायत सचिव के हस्तक्षेप से मुक्त रखा जाए, ताकि धारा 4(क) के तहत रूढ़िजन्य विधि, सामाजिक-धार्मिक प्रथाओं और पारंपरिक संसाधन प्रबंधन की व्यवस्था प्रभावी ढंग से लागू हो सके।
प्रतिनिधिमंडल ने यह भी आग्रह किया कि संताल परगना क्षेत्र में लागू संताल सिविल रूल्स 1946 और संताल परगना जस्टिस रेग्यूलेशन 1893 में किसी प्रकार का संशोधन न किया जाए। उनका कहना था कि ये नियम आदिवासी स्वशासन की बुनियादी संरचना हैं और क्षेत्र की पारंपरिक प्रशासनिक व्यवस्था को संरक्षित करते हैं।
इसके अलावा महासभा ने मांझी, नाईकी, पारानीक, जोगमांझी, गोडित, कुडाम नाईकी, परगाना समेत पारंपरिक पदधारियों को दी जाने वाली सम्मान राशि समय पर योग्य व्यक्तियों तक पहुंचाने की मांग भी उठाई।
प्रतिनिधिमंडल में राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित शिक्षक सह महासभा के संरक्षक सुनील कुमार बास्की, जामताड़ा जिला अध्यक्ष सुनील कुमार हांसदा, समाजसेवी सर्जन हांसदा, लॉ बिर बैसी के मांझी बाबा हराधन मुर्मू, मांझी बाबा मिशील मुर्मू (दुमका), नाजिर सोरेन, डॉ. सोरेन, सज्जन कुमार मुर्मू, संजीत हेम्ब्रम और कमलदेव मरांडी शामिल थे।
राज्यपाल से हुई यह मुलाकात संताल परगना क्षेत्र में पारंपरिक अधिकारों और स्वशासन व्यवस्था की रक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखी जा रही है।
