डब्ल्यूपीआई के आधार पर दरों में संशोधन, उद्योग और बिजली पर पड़ेगा असर
Dhanbad
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव का असर अब भारत के कोयला बाजार पर भी दिखने लगा है। कोल इंडिया ने 1 अप्रैल 2026 से कोयले की कीमतों में संशोधन करने का फैसला लिया है। कंपनी ने यह बदलाव थोक मूल्य सूचकांक (WPI) के आधार पर किया है, जिससे कोयले की कीमतों में हल्की बढ़ोतरी होगी।
डब्ल्यूपीआई बढ़ने से कीमतों में संशोधन
कंपनी के अनुसार, दिसंबर 2024 में डब्ल्यूपीआई 155.7 था, जो दिसंबर 2025 में बढ़कर 157.2 हो गया है। यानी लगभग 0.96 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई। नियमानुसार इस वृद्धि का 25 प्रतिशत ही लागू किया गया है, जिसके चलते कोयले की कीमतों में करीब 0.24 फीसदी की बढ़ोतरी की गई है।
1 अप्रैल से लागू होंगी नई दरें
कोल इंडिया ने अपनी सभी सहायक कंपनियों—बीसीसीएल, ईसीएल और सीसीएल—को इस संबंध में अधिसूचना जारी कर दी है। नई ‘मॉड्यूलेटेड प्राइस’ 1 अप्रैल 2026 की मध्यरात्रि से लागू होंगी। यह दरें नॉन-रेगुलेटेड सेक्टर (NRS) के लिए प्रभावी होंगी और ई-ऑक्शन में बेस प्राइस के रूप में उपयोग की जाएंगी।
ई-ऑक्शन और अलग-अलग ग्रेड पर असर
कंपनी ने स्पष्ट किया है कि ई-ऑक्शन में मिलने वाला प्रीमियम इन बेस कीमतों के ऊपर जोड़ा जाएगा। साथ ही कोकिंग और वॉश्ड कोयले की कीमतें भी इसी फॉर्मूले के आधार पर अलग-अलग तय की जाएंगी। इस फैसले का उद्देश्य बाजार के अनुरूप पारदर्शी मूल्य निर्धारण सुनिश्चित करना बताया गया है।
विभिन्न ग्रेड के कोयले की नई कीमतें
नई दरों के अनुसार जी-2 ग्रेड का कोयला 3600 रुपये, जी-3 का 3449 रुपये और जी-4 का 3287 रुपये तय किया गया है। वहीं जी-10 ग्रेड का कोयला 1360 रुपये और जी-17 का 561 रुपये होगा। लो ग्रेड कोयले की कीमत 534 से 507 रुपये के बीच रखी गई है।
कोयले की कीमतों में इस बढ़ोतरी का असर बिजली उत्पादन, उद्योग और आम उपभोक्ताओं पर पड़ने की संभावना है, जिससे आने वाले समय में महंगाई बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं।
