Ranchi
मुख्यमंत्री Hemant Soren ने प्रकृति पर्व सरहुल के अवसर पर रांची के सिरमटोली स्थित सरना स्थल में पारंपरिक विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना कर राज्यवासियों की सुख, समृद्धि और खुशहाली की कामना की। इस दौरान उन्होंने प्रकृति, संस्कृति और सामाजिक समरसता के महत्व को रेखांकित किया।
मुख्यमंत्री अपनी धर्मपत्नी विधायक कल्पना सोरेन के साथ सरना स्थल पहुंचे, जहां पाहन द्वारा पारंपरिक रीति से पूजा सम्पन्न कराई गई। इस दौरान मुख्यमंत्री के कान में सरई (साल) का फूल खोंसकर उन्हें आशीर्वाद दिया गया, जो प्रकृति और मानव के गहरे संबंध का प्रतीक माना जाता है।
सरहुल: प्रकृति से जुड़े रहने का संदेश
अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने कहा कि सरहुल महोत्सव प्रकृति से जुड़ाव का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि मनुष्य की यात्रा प्रकृति से शुरू होकर उसी में समाहित होती है, इसलिए इसे संरक्षित और संजोकर रखना हम सभी की जिम्मेदारी है।
संस्कृति और विरासत के संरक्षण पर जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरहुल आदिवासी संस्कृति, प्रकृति के प्रति सम्मान और सामुदायिक एकता का जीवंत उदाहरण है। यह पर्व पर्यावरण संरक्षण और आपसी सौहार्द का संदेश देता है। राज्य सरकार आदिवासी परंपराओं, संस्कृति और विरासत के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
अंत में मुख्यमंत्री ने सभी प्रदेशवासियों को इस पावन पर्व की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं और प्रकृति के प्रति जागरूक रहने का आह्वान किया।
