Patna/New Delhi
ज़मीन के बदले नौकरी मामले में पूर्व रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव और बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबरी देवी सोमवार को दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट में पेश हुए। अदालत ने इस मामले में उनके खिलाफ औपचारिक रूप से आरोप तय किए।
पेशी के दौरान दोनों नेताओं ने खुद को बेकसूर बताया और कहा कि वे ट्रायल का सामना करने के लिए तैयार हैं। यह मामला कथित तौर पर रेलवे में ग्रुप D की नौकरियों के बदले उम्मीदवारों से ज़मीन लेने से जुड़ा है।
स्पेशल जज विशाल गोगने ने आरोप तय करते हुए कहा कि जब तक अदालत से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की अनुमति न हो, तब तक आरोपियों को व्यक्तिगत रूप से पेश होना होगा।
इससे पहले 9 जनवरी को अदालत ने इस मामले में लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी, तेजस्वी यादव, तेज प्रताप यादव, मीसा भारती सहित अन्य आरोपियों के खिलाफ आरोप तय करने का निर्देश दिया था। स्पेशल CBI कोर्ट ने कहा था कि पहली नजर में सरकारी नौकरियों का इस्तेमाल अचल संपत्ति हासिल करने के लिए किया गया। अदालत ने इसे एक संगठित आपराधिक साजिश का मामला बताया था।
हालांकि, कोर्ट ने रेलवे के चीफ पर्सनल ऑफिसर्स और कुछ अन्य अधिकारियों सहित 52 आरोपियों को बरी कर दिया। सुनवाई के दौरान पांच आरोपियों की मृत्यु हो चुकी है।
इस मामले की जांच सीबीआई ने की है। एजेंसी ने 18 मई 2022 को केस दर्ज किया था और 103 आरोपियों के खिलाफ दो चार्जशीट तथा दो सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल की थीं। आरोप है कि रेलवे की ग्रुप D नौकरियों के बदले जमीन के टुकड़े लिए गए।
बचाव पक्ष की ओर से दलील दी गई कि जमीन की खरीद-फरोख्त विधिवत सेल डीड के जरिए हुई और इसके बदले भुगतान किया गया। लालू प्रसाद यादव के वकील ने कहा कि मामला राजनीतिक रूप से प्रेरित है और किसी भी उम्मीदवार को अनुचित लाभ देने का कोई प्रत्यक्ष सबूत नहीं है।
राबड़ी देवी की ओर से भी कहा गया कि जमीन खरीदना कोई अपराध नहीं है और किसी भी आरोपी उम्मीदवार को कोई फायदा नहीं पहुंचाया गया।
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि प्रथम दृष्टया यह एक बड़ी आपराधिक साजिश का मामला प्रतीत होता है। अब इस प्रकरण में नियमित ट्रायल की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
