Davos/Ranchi
एक ओर जहां झारखण्ड भाजपा के कई नेता मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की दावोस यात्रा को लेकर सवाल उठा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम, दावोस में भाजपा के सीनियर नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री जयंत सिन्हा ने स्वयं मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मुलाकात की। इस मुलाकात ने सियासी गलियारों में नई चर्चा को जन्म दे दिया है।
जयंत सिन्हा ने सोशल मीडिया पोस्ट के ज़रिए बताया कि दावोस में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के साथ उनकी सार्थक बातचीत हुई। चर्चा का मुख्य फोकस झारखण्ड के आर्थिक विकास, वैश्विक निवेश आकर्षित करने और राज्य को एक सशक्त, विश्वसनीय व प्रतिस्पर्धी निवेश गंतव्य के रूप में स्थापित करने पर रहा।
बैठक में उद्योग, मैन्युफैक्चरिंग, खनन, ग्रीन एनर्जी और अन्य उभरते क्षेत्रों में निवेश की संभावनाओं पर विचार-विमर्श किया गया। साथ ही जलवायु परिवर्तन की चुनौती को देखते हुए ग्रीन इन्वेस्टमेंट और क्लाइमेट फाइनेंस को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर भी सहमति बनी।
जयंत सिन्हा ने कहा कि झारखण्ड और भारत में विदेशी निवेश बढ़ने से पर्यावरण के अनुकूल तकनीक, स्वच्छ ऊर्जा और सतत विकास को गति मिल सकती है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि वैश्विक निवेश का सीधा लाभ ज़मीन पर दिखता है—नए उद्योग, बेहतर रोज़गार, मज़बूत स्थानीय अर्थव्यवस्था और विकास के नए अवसर सृजित होते हैं, जिससे हज़ारीबाग समेत पूरे झारखण्ड को फायदा होगा।
दावोस जैसे वैश्विक मंच पर झारखण्ड की सक्रिय उपस्थिति को जयंत सिन्हा ने एक सकारात्मक संकेत बताया और कहा कि राज्य अब केवल संभावनाओं की भूमि नहीं, बल्कि निवेश और विकास की दिशा में मजबूती से आगे बढ़ रहा है। राजनीतिक आलोचनाओं के बीच यह मुलाकात झारखण्ड के विकास एजेंडे पर एक अलग तस्वीर पेश करती है।
