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नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली बिहार सरकार ने 1426 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्तावों को रद्द कर दिया है। उद्योग विभाग ने विभिन्न कारणों से इन प्रस्तावों को स्टेज-1 क्लीयरेंस के दौरान ही नामंजूर कर दिया। इसके तहत कुल 48 निवेश प्रस्तावों को लाल झंडी दिखाई गई। हाल ही में राज्य निवेश प्रोत्साहन पर्षद की बैठक में विस्तृत समीक्षा के बाद इन प्रस्तावों को खारिज कर दिया गया।
इन प्रस्तावों में खाद्य प्रसंस्करण, मैन्यूफैक्चरिंग, हेल्थकेयर, प्लास्टिक व रबड़, अपारंपरिक ऊर्जा (सौर ऊर्जा), टेक्सटाइल व चर्म उद्योग तथा लकड़ी सेक्टर से जुड़े निवेश शामिल थे। सबसे अधिक प्रस्ताव खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र से थे, जिनमें से 27 योजनाओं को अस्वीकृत कर दिया गया।
उद्योग विभाग के अनुसार, ये सभी प्रस्ताव सरकार द्वारा तय मापदंडों पर खरे नहीं उतर सके। कई मामलों में निवेशकों ने आवश्यक जानकारी समय पर उपलब्ध नहीं कराई। बताया गया कि कुल 42 प्रस्ताव ऐसे थे जिनके बारे में बार-बार जानकारी मांगे जाने के बावजूद निवेशकों की ओर से कोई जवाब नहीं मिला और वे निष्क्रिय पड़े रहे। ऐसे प्रस्तावों को तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया गया।
इसके अलावा चार निवेशकों ने स्वयं ही अपने प्रस्ताव वापस लेने का अनुरोध किया, जबकि दो निवेशक बिहार औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन नीति 2016 की पात्रता पूरी नहीं कर पाए। इसलिए उन्हें भी खारिज कर दिया गया।
उद्योग विभाग ने हाल के दिनों में ऐसे सभी प्रस्तावों की गहन समीक्षा शुरू की है, जिनके निवेशक प्रस्ताव देने के बाद निष्क्रिय हो गए थे। राज्य के उद्योग मंत्री Dilip Jaiswal ने भी स्पष्ट किया था कि सभी लंबित प्रस्तावों की समीक्षा की जाएगी और जो मापदंडों पर खरे नहीं उतरेंगे, उन्हें रद्द कर दिया जाएगा। साथ ही उन्होंने योग्य निवेश प्रस्तावों को हर संभव सुविधा देने की बात भी कही।
रद्द किए गए प्रस्तावों का सेक्टरवार ब्योरा
- खाद्य प्रसंस्करण – 27 प्रस्ताव – 1241 करोड़
- मैन्यूफैक्चरिंग – 5 प्रस्ताव – 30 करोड़
- हेल्थकेयर – 3 प्रस्ताव – 26 करोड़
- प्लास्टिक व रबड़ – 7 प्रस्ताव – 33 करोड़
- अपारंपरिक ऊर्जा – 2 प्रस्ताव – 49 करोड़
- टेक्सटाइल व चर्म उद्योग – 1 प्रस्ताव – 2.25 करोड़
- लकड़ी सेक्टर – 1 प्रस्ताव – 4.80 करोड़
