बंगाल SIR: इस बूथ से हटे सभी मुस्लिम वोटरों के नाम, BLO भी गायब; उठे गंभीर सवाल

KOLKATA

पश्चिम बंगाल में चुनाव से ठीक पहले मतदाता सूची को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। बशीरहाट नॉर्थ विधानसभा क्षेत्र के एक बूथ से कथित तौर पर सभी मुस्लिम वोटरों के नाम हटा दिए जाने के बाद इलाके में तनाव और विरोध शुरू हो गया है। यह मामला तब सामने आया जब चुनाव आयोग द्वारा जारी पहली पूरक मतदाता सूची में बड़ी संख्या में नाम गायब पाए गए।

इस पूरे विवाद की शुरुआत बूथ नंबर 5, बोरों गोबरा गांव से हुई, जहां एक ही बूथ से 340 वोटरों के नाम एक साथ हटा दिए गए। खास बात यह है कि ये सभी नाम मुस्लिम समुदाय से जुड़े बताए जा रहे हैं, जिससे मामले ने सांप्रदायिक रंग ले लिया है और पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो गए हैं।

चुनाव आयोग की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक पश्चिम बंगाल में पूरक सूची के तहत करीब 32 लाख मतदाताओं की जांच की गई थी, जिसमें से लगभग 12 लाख नाम हटा दिए गए। हालांकि स्थानीय स्तर पर एक ही बूथ से इतनी बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने से लोगों में नाराजगी बढ़ गई है।

क्या है पूरा मामला?

बशीरहाट ब्लॉक-2 के बेगमपुर बीबीपुर ग्राम पंचायत के इस बूथ पर कुल 992 रजिस्टर्ड वोटर थे। इनमें से पहले 38 नाम सामान्य कारणों जैसे मौत या स्थान परिवर्तन की वजह से हटाए गए थे। इसके अलावा 358 वोटरों को उनकी पात्रता की जांच के लिए बुलाया गया था।

ड्राफ्ट सूची में 18 मामलों का निपटारा कर दिया गया था, जबकि 340 नाम “अंडर एडजुडिकेशन” में रखे गए थे। लेकिन 23 तारीख को जारी पूरक सूची में इन सभी 340 नामों को एक साथ डिलीट कर दिया गया, जिससे विवाद और गहरा गया।

विरोध और आरोप

नाम हटाए जाने के बाद स्थानीय लोगों ने इसका विरोध शुरू कर दिया। रिपोर्ट्स के मुताबिक 100 से अधिक लोग सड़कों पर उतर आए और बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) के घर के बाहर प्रदर्शन किया। लोगों का आरोप है कि यह कार्रवाई एक विशेष समुदाय को निशाना बनाकर की गई है।

प्रभावित मतदाताओं ने यह भी कहा कि उन्होंने चुनाव आयोग के नियमों के अनुसार जरूरी दस्तावेज जमा किए थे, फिर भी उनके नाम सूची से हटा दिए गए। इससे चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठने लगे हैं।

BLO का पक्ष और आगे की कार्रवाई

बूथ लेवल ऑफिसर मोहम्मद शफिउल आलम ने बताया कि उन्होंने इस मामले में ब्लॉक डेवलपमेंट ऑफिसर से संपर्क किया, लेकिन उन्हें कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला। उनका कहना है कि वे इस मुद्दे को ट्रिब्यूनल में ले जाकर कानूनी लड़ाई लड़ेंगे।

वहीं प्रभावित मतदाताओं ने भी न्याय की मांग की है और चुनाव आयोग से इस मामले में पारदर्शिता बरतने की अपील की है। अब यह देखना अहम होगा कि प्रशासन इस विवाद को कैसे सुलझाता है और चुनाव से पहले मतदाता सूची में भरोसा बहाल कर पाता है या नहीं।

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