करियर रेस से बाहर क्यों हो रही है Gen Z? ‘एंटी-एम्बिशन’ का नया ट्रेंड

प्रमोशन से ज्यादा इमोशनल स्टेबिलिटी की चाह, नौकरी को नहीं जिंदगी को प्राथमिकता दे रहे युवा प्रोफेशनल

CENTRAL DESK

दशकों तक ‘एम्बिशन’ का मतलब साफ था—तेजी से प्रमोशन, ज्यादा सैलरी, बड़ी टीम, ऊंचा पद। लेकिन अब ऑफिस में कदम रख रही नई पीढ़ी इस परिभाषा को बदल रही है। भारत में Gen Z प्रोफेशनल्स करियर की पारंपरिक दौड़ से धीरे-धीरे बाहर निकल रहे हैं। वजह यह नहीं कि उनमें महत्वाकांक्षा की कमी है, बल्कि इसलिए कि वे इस दौड़ की कीमत को नए नजरिए से देख रहे हैं।

इंडिया टूडे में छपी एक रिपोर्ट के अनुसार, हालिया ग्लोबल वर्कफोर्स सर्वे बताते हैं कि करीब आधे युवा कर्मचारी खुद को पारंपरिक अर्थों में “एम्बिशियस” नहीं मानते। एक अन्य अध्ययन में 47 प्रतिशत कर्मचारियों ने साफ कहा कि वे अब कॉर्पोरेट सीढ़ी चढ़ने में रुचि नहीं रखते। उनके लिए प्रमोशन से ज्यादा जरूरी है, मेंटल हेल्थ, इमोशनल स्टेबिलिटी और प्रेडिक्टेबल लाइफ।

बेंगलुरु के 24 वर्षीय डेटा एनालिस्ट आरव कहते हैं, “मैंने अपने सीनियर्स को 30 की उम्र से पहले बर्नआउट होते देखा है। अगर एम्बिशन का मतलब लगातार स्ट्रेस है, तो मुझे वह नहीं चाहिए।”

यह सोच अब ‘एंटी-एम्बिशन’ के नाम से पहचानी जा रही है। हालांकि विशेषज्ञ स्पष्ट करते हैं कि इसका मतलब काम से दूरी बनाना नहीं है, बल्कि सफलता की परिभाषा को रीसेट करना है, खासतौर पर महामारी के बाद, बढ़ती महंगाई और लगातार छंटनी के माहौल में।

एम्बिशन की नई परिभाषा

एक हालिया Gen Z सर्वे के अनुसार 52 प्रतिशत युवा करियर ग्रोथ से ज्यादा इमोशनल स्टेबिलिटी को प्राथमिकता देते हैं। वहीं 41 प्रतिशत कम सैलरी स्वीकार करने को तैयार हैं, बशर्ते उन्हें निश्चित काम के घंटे और साइकोलॉजिकल सेफ्टी मिले।

दिल्ली में डिजिटल मार्केटिंग प्रोफेशनल 26 वर्षीय मेहक कहती हैं, “मेरे लिए एम्बिशन का मतलब है अपनी जिंदगी के लिए समय होना। मैं अपना काम अच्छे से करती हूं, लेकिन मैं नहीं चाहती कि काम मेरे हर विचार पर हावी हो जाए।”

ग्लोबल HR फर्म Randstad की रिपोर्ट भी यही संकेत देती है कि अब एम्बिशन का मतलब केवल ऊपर बढ़ना नहीं, बल्कि ऑटोनॉमी, फ्लेक्सिबिलिटी और मीनिंगफुल वर्क है। करियर ग्रोथ अब सिर्फ वर्टिकल नहीं, बल्कि कई दिशाओं में देखी जा रही है।

भारत में यह बदलाव खासतौर पर IT, मीडिया, स्टार्टअप और कंसल्टिंग जैसे सेक्टर्स में दिख रहा है, जहां कभी ‘हसल कल्चर’ को सफलता का पैमाना माना जाता था।

युवा कर्मचारी क्यों बदल रहे हैं रास्ता?

विशेषज्ञ तीन बड़े कारण बताते हैं:

1. महामारी का अनुभव

Gen Z ने अपने घरों में नौकरी छूटते, वेतन कटते और लंबे समय तक काम के बावजूद असुरक्षा देखी। इससे एक संदेश गया—सिर्फ मेहनत सुरक्षा की गारंटी नहीं।

2. आर्थिक अनिश्चितता

लगातार छंटनी, ऑटोमेशन का डर और बढ़ती जीवन लागत ने युवाओं को स्टेटस से ज्यादा स्थिरता की ओर मोड़ा है। फ्रीलांस काम, साइड हसल और छोटे जॉब टेन्योर अब कमजोरी नहीं, बल्कि सुरक्षा कवच बन रहे हैं।

3. मानसिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता

मुंबई की 23 वर्षीय जूनियर कंसल्टेंट रिया कहती हैं, “मैं बर्नआउट को नॉर्मल नहीं मानती। पिछली पीढ़ी की तरह ‘पुश थ्रू’ करना मुझे सफल नहीं, डरावना लगता है।”

ड्रीम जॉबकी अवधारणा कमजोर

एक भारतीय इंडस्ट्री रिपोर्ट के अनुसार, Gen Z के पांच में से एक से भी कम युवा प्रतिष्ठित संगठन में लंबे समय तक टिके रहना अपना प्राथमिक लक्ष्य मानते हैं। कई युवा एक ही करियर में सिमटने के बजाय नौकरी के साथ कंटेंट क्रिएशन, उद्यमिता या फ्रीलांसिंग को जोड़ना चाहते हैं।

इसी वजह से शुरुआती करियर में Gen Z का औसत जॉब टेन्योर करीब एक साल का है, जो पिछली पीढ़ियों की तुलना में काफी कम है। HR विशेषज्ञ इसे अधीरता नहीं, बल्कि प्रयोग की मानसिकता मानते हैं। एक वरिष्ठ HR कंसल्टेंट के अनुसार, “Gen Z के लिए एक जगह टिके रहना वफादारी नहीं, जोखिम है। वे फंसने से पहले आगे बढ़ जाना बेहतर समझते हैं।”

ऑफिस में एंटी-एम्बिशनकैसा दिखता है?

यह ट्रेंड कई रूपों में सामने आ रहा है:

  • लंबे घंटों वाले प्रमोशन को ठुकराना
  • अतिरिक्त जिम्मेदारी के बदले स्पष्ट वेतन और लचीलापन मांगना
  • तय दायरे में बेहतरीन काम करना, लेकिन ‘ओवरडिलीवरी’ से बचना
  • छुट्टियों और निजी समय को बिना अपराधबोध के प्राथमिकता देना

27 वर्षीय प्रोडक्ट डिजाइनर कुणाल कहते हैं, “मैं अपने काम में अच्छा हूं, लेकिन लोगों को मैनेज करना मेरी महत्वाकांक्षा क्यों मानी जाए? हर एम्बिशन का मतलब बॉस बनना क्यों है?”

नियोक्ताओं के लिए चेतावनी या अवसर?

यह बदलाव कंपनियों के लिए चुनौती भी है और संकेत भी। पारंपरिक रिवॉर्ड सिस्टम—बड़े पदनाम, भविष्य के वादे, अस्पष्ट ग्रोथ पाथ—अब युवाओं को आकर्षित नहीं करते। उनकी प्राथमिकताएं स्पष्ट हैं: पारदर्शी वेतन, स्पष्ट सीमाएं, लचीला काम और ऐसा नेतृत्व जो परिणाम को महत्व दे, दिखावे को नहीं।

‘एंटी-एम्बिशन’ काम से इनकार नहीं है। यह उस काम से इनकार है जो जीवन को पूरी तरह निगल ले। Gen Z के लिए सफलता अब यह नहीं कि आप कितनी ऊंचाई तक पहुंचे, बल्कि यह कि उस ऊंचाई पर पहुंचकर भी आप कितनी संतुलित जिंदगी जी पा रहे हैं।

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