NEW DELHI
नीति आयोग की एक नई रिपोर्ट ने भारत के रोजगार बाज़ार को लेकर एक साथ चेतावनी और उम्मीद दोनों पेश की है। रिपोर्ट के मुताबिक, आने वाले पांच वर्षों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की वजह से देश के टेक सेक्टर से करीब 20 लाख नौकरियां खत्म हो सकती हैं। लेकिन दूसरी तरफ, यही तकनीक 40 लाख नए रोजगार के अवसर भी पैदा करेगी — बशर्ते भारत अपनी वर्कफोर्स को नई स्किल्स से लैस कर सके।
नीति आयोग के सीईओ बीवीआर सुब्रमण्यम ने कहा कि यह सिर्फ नौकरियों की गिनती का मामला नहीं है, बल्कि यह देश की अर्थव्यवस्था और बाजार की सेहत से जुड़ा मुद्दा है।
उन्होंने कहा, “अगर हमने समय रहते तैयारी नहीं की, तो केवल 20 लाख लोग ही नहीं, बल्कि उनसे जुड़ी 2-3 करोड़ आबादी की आमदनी भी प्रभावित होगी। इससे बाजार में मांग घटेगी और अर्थव्यवस्था पर असर पड़ेगा।”
AI से बदलेगा नौकरी का ढांचा
सुब्रमण्यम ने बताया कि देश के टेक सेक्टर में इस समय करीब 80 लाख लोग काम करते हैं, लेकिन अगले कुछ वर्षों में नौकरियों का स्वरूप पूरी तरह बदल जाएगा। अब कंपनियों को ऐसे लोग चाहिए जो डेटा एनालिटिक्स, मशीन लर्निंग और AI टूल्स समझ सकें। यानी पुरानी स्किल्स से आगे बढ़कर अपस्किलिंग और रिस्किलिंग ही भविष्य की कुंजी होगी।
उन्होंने हाल ही में एक बड़ी आईटी कंपनी का उदाहरण दिया, जिसने पिछले तीन महीनों में 20,000 कर्मचारियों की छंटनी की। इसके अलावा, इंजीनियरिंग कॉलेजों में कैंपस प्लेसमेंट की स्थिति भी बदल रही है। कई प्रतिष्ठित कॉलेजों में अब केवल 40-50% छात्रों को ही जॉब ऑफर मिल पा रहे हैं।
‘नेशनल एआई टैलेंट मिशन’ का सुझाव
इस चुनौती को अवसर में बदलने के लिए नीति आयोग ने एक बड़ा कदम सुझाया है — ‘नेशनल एआई टैलेंट मिशन’। इस मिशन का मकसद भारत को AI और डिजिटल स्किल्स में अग्रणी देश बनाना है, जहां उद्योग, सरकार और शैक्षणिक संस्थान मिलकर काम करें।
नीति आयोग का मानना है कि अगर भारत अभी से निवेश और प्रशिक्षण पर ध्यान दे, तो 2035 तक देश AI टैलेंट और इनोवेशन का ग्लोबल सेंटर बन सकता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत के पास 90 लाख से अधिक टेक प्रोफेशनल्स और दुनिया की सबसे बड़ी युवा आबादी है, जो किसी भी देश के लिए ‘डिजिटल डिविडेंड’ साबित हो सकती है।
स्किल्स ही नई करेंसी होंगी
नीति आयोग की फेलो देबजानी घोष ने रिपोर्ट पर टिप्पणी करते हुए कहा,
“AI नौकरियां लेगा या बनाएगा, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि हम आज क्या तैयारी करते हैं। स्किल्स अब सिर्फ करियर का हिस्सा नहीं, बल्कि नई करेंसी बनने जा रही हैं।”
उन्होंने कहा कि भारत के पास मौका है कि वह केवल AI के उपयोगकर्ता के रूप में नहीं, बल्कि AI क्रिएशन और इनोवेशन के नेतृत्वकर्ता के रूप में उभरे।
निष्कर्ष नहीं, एक संकेत
रिपोर्ट के मुताबिक, आने वाला दशक भारत के लिए टेक्नोलॉजी-चालित बदलाव का दशक होगा। नौकरियां जाएंगी, पर जो लोग समय रहते नई स्किल्स सीख लेंगे, उनके लिए अवसर भी कई गुना बढ़ेंगे।
AI अब सिर्फ एक टेक्नोलॉजी नहीं रही — यह भारत के रोजगार, शिक्षा और आर्थिक ढांचे को रीडिफाइन करने वाला फैक्टर बन चुकी है।
