25% टैरिफ के बाद ट्रंप प्रशासन की एक और सख्ती, इन 6 भारतीय कंपनियों पर लगाया बैन

31st July 2025

नई दिल्ली

अमेरिका ने ईरान के साथ कारोबार करने के आरोप में भारत की छह कंपनियों पर कड़े प्रतिबंध लगाए हैं। इन कंपनियों पर आरोप है कि इन्होंने अमेरिकी प्रतिबंधों की अनदेखी करते हुए ईरान से करोड़ों डॉलर के पेट्रोलियम और पेट्रोकेमिकल उत्पाद खरीदे। यह कार्रवाई अमेरिकी कार्यकारी आदेश 13846 के तहत की गई है, जिसका मकसद ईरान की आर्थिक गतिविधियों को सीमित करना है।

अमेरिकी विदेश विभाग ने कहा कि ईरानी शासन क्षेत्रीय अस्थिरता फैलाने और आतंकवादी संगठनों को फंड देने के लिए तेल और गैस की बिक्री से होने वाली कमाई का इस्तेमाल करता है। इसी वजह से उन देशों और कंपनियों पर कार्रवाई की जा रही है जो ईरान के साथ व्यापारिक संबंध बनाए हुए हैं। बुधवार को अमेरिका ने कुल 20 कंपनियों पर प्रतिबंधों की घोषणा की, जिनमें भारत की छह कंपनियाँ भी शामिल हैं।

इन कंपनियों पर प्रतिबंध

जिन भारतीय कंपनियों पर प्रतिबंध लगाए गए हैं, उनमें अल्केमिकल सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड, ग्लोबल इंडस्ट्रियल केमिकल्स लिमिटेड, जुपिटर डाई केम प्राइवेट लिमिटेड, रमणिकलाल एस गोसालिया एंड कंपनी, पर्सिस्टेंट पेट्रोकेम प्राइवेट लिमिटेड और कंचन पॉलिमर्स के नाम शामिल हैं। अमेरिकी अधिकारियों का दावा है कि इन कंपनियों ने जनवरी 2024 से जनवरी 2025 के बीच ईरान से भारी मात्रा में पेट्रोकेमिकल उत्पादों का आयात किया। सबसे अधिक खरीद अल्केमिकल सॉल्यूशंस द्वारा की गई, जिसकी कीमत करीब 84 मिलियन डॉलर (लगभग ₹700 करोड़) बताई जा रही है।

प्रतिबंध के परिणाम क्या होंगे

इन प्रतिबंधों के चलते इन सभी कंपनियों की अमेरिका में मौजूद संपत्तियाँ और आर्थिक हित फ्रीज कर दिए जाएंगे। इसके अलावा, कोई भी अमेरिकी नागरिक या कंपनी अब इन संस्थानों के साथ व्यापार नहीं कर सकेगी। किसी भी प्रकार की सेवा, वस्तु या वित्तीय लेन-देन पर रोक होगी। यदि इन प्रतिबंधित कंपनियों की किसी अन्य फर्म में 50 प्रतिशत या उससे अधिक की हिस्सेदारी है, तो वह कंपनी भी इन प्रतिबंधों के दायरे में आ जाएगी।

अमेरिकी विदेश विभाग ने स्पष्ट किया है कि इन प्रतिबंधों का उद्देश्य केवल सज़ा देना नहीं है, बल्कि उन कंपनियों और देशों को चेतावनी देना है जो ईरान के साथ व्यापार कर अमेरिका के अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों की अनदेखी कर रहे हैं। यह प्रतिबंध भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों पर क्या असर डालेगा, यह देखना अब बाकी है।

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