Mujaffarpur
पांच साल की मासूम खुशी के अपहरण को चार साल बीत चुके हैं, लेकिन अब तक बच्ची का कोई सुराग नहीं मिला। उल्टा, उसके पिता राजन साह ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) के एक अधिकारी पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि केस वापस नहीं लेने पर उन्हें और उनके परिवार को फंसाने की धमकी दी जा रही है।
राजन साह ने सीबीआई के संयुक्त निदेशक को पत्र लिखकर कहा है कि मौजूदा जांच अधिकारी पटना हाईकोर्ट में लंबित क्रिमिनल रिट और अवमानना वाद को वापस लेने का दबाव बना रहे हैं। उनका आरोप है कि यदि वे हाईकोर्ट से मामला वापस नहीं लेते हैं, तो अपहरण केस में गलत अनुसंधान कर परिवार के खिलाफ ही चार्जशीट दाखिल करने की धमकी दी जा रही है।
व्हाट्सएप कॉल पर कथित धमकी
राजन साह के मुताबिक, 12 फरवरी को पटना हाईकोर्ट में मामले की सुनवाई हुई थी। कोर्ट ने दो सप्ताह के भीतर सीबीआई से प्रगति रिपोर्ट मांगी थी। इसके बाद जांच अधिकारी ने उन्हें व्हाट्सएप कॉल कर कथित रूप से अपमानित किया और कहा कि हाईकोर्ट में सुनवाई करवाने का अंजाम भुगतना पड़ेगा। यहां तक कि जेल भेजने की भी बात कही गई।
पिता का कहना है कि मौजूदा जांच अधिकारी के आने के बाद से उन्हें लगातार मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है। वे इस पूरे घटनाक्रम को न्याय की लड़ाई को कमजोर करने की कोशिश मान रहे हैं।
2021 में पूजा पंडाल से हुआ था अपहरण
16 फरवरी 2021 को ब्रह्मपुरा थाना क्षेत्र के पमरिया टोला में एक पूजा पंडाल से पांच वर्षीय खुशी का अपहरण कर लिया गया था। अगले दिन उसके पिता ने अज्ञात के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई थी। शुरुआती जांच में पुलिस ने अमन कुमार को गिरफ्तार कर जेल भेजा और 30 अप्रैल 2021 को उसके खिलाफ आरोप पत्र भी दाखिल किया।
बाद में पटना हाईकोर्ट के आदेश पर 20 दिसंबर 2022 से मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी गई। लेकिन परिवार का कहना है कि चार साल में भी बेटी का कोई सुराग नहीं मिला। अब जांच की दिशा पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
राजन साह ने संयुक्त निदेशक से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और संबंधित अधिकारी के आचरण की जांच हो। उनका कहना है कि वे सिर्फ अपनी बेटी को ढूंढना चाहते हैं, लेकिन अब उन्हें न्याय के लिए ही संघर्ष करना पड़ रहा है।
