RANCHI
रांची विश्वविद्यालय के जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा संकाय अंतर्गत कुड़ुख विभाग में स्वतंत्रता सेनानी वीर बुधु भगत की 234वीं जयंती श्रद्धा, गर्व और ऐतिहासिक चेतना के साथ मनाई गई। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों और शोधार्थियों को आदिवासी प्रतिरोध की गौरवशाली परंपरा तथा जल-जंगल-जमीन आधारित जनसंघर्ष की विरासत से परिचित कराना रहा।
कार्यक्रम की अध्यक्षता विभागाध्यक्ष डॉ. बन्दे खलखो ने की। अपने वक्तव्य में उन्होंने कहा कि वीर बुधु भगत छोटानागपुर क्षेत्र के उन अग्रणी जननायकों में रहे जिन्होंने औपनिवेशिक शासन के दमन और अन्याय के विरुद्ध संगठित प्रतिरोध खड़ा किया। उन्होंने लरका आंदोलन का नेतृत्व करते हुए आदिवासी समाज के प्राकृतिक और सामुदायिक अधिकारों की रक्षा के लिए ऐतिहासिक संघर्ष किया। यह आंदोलन केवल राजनीतिक विद्रोह नहीं था, बल्कि सांस्कृतिक स्वाभिमान, सामाजिक न्याय और पारंपरिक जीवन मूल्यों की रक्षा का व्यापक अभियान था।
वक्ताओं ने रेखांकित किया कि वीर बुधु भगत का संघर्ष भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के जनपदीय अध्याय का महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिसे मुख्यधारा इतिहास में अपेक्षित स्थान नहीं मिल पाया। उनके नेतृत्व ने स्थानीय समुदायों में आत्मसम्मान, एकजुटता और अधिकार चेतना को मजबूत किया। आज के संदर्भ में भी उनका जीवन जल, जंगल और जमीन की सुरक्षा तथा आदिवासी अस्मिता के प्रश्नों को समझने की प्रेरणा देता है।
कार्यक्रम में विभाग के शिक्षकगण, शोधार्थी और छात्र-छात्राओं ने भाग लिया। इस अवसर पर विचार गोष्ठी, स्मरण वक्तव्य और प्रश्नोत्तर सत्र का भी आयोजन किया गया, जिसमें वीर बुधु भगत के योगदान और ऐतिहासिक भूमिका पर विस्तार से चर्चा हुई। आयोजकों ने कहा कि ऐसे कार्यक्रम नई पीढ़ी को अपनी ऐतिहासिक जड़ों से जोड़ने का सशक्त माध्यम हैं।
