झारखंड स्थापना दिवस से लेकर जनसुनवाई तक, दुमका में सीएम की सक्रिय मौजूदगी
DUMKA
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन बीते 2 फरवरी से लगातार दुमका में मौजूद हैं और इस दौरान उनका फोकस सीधे तौर पर आम जनता से संवाद और प्रशासनिक निगरानी पर रहा है। मंगलवार को दुमका के खिजुरिया स्थित अपने आवास पर मुख्यमंत्री से विभिन्न क्षेत्रों से आए आम नागरिकों ने मुलाकात कर अपनी-अपनी समस्याएं रखीं।
मुख्यमंत्री ने लोगों की शिकायतों को गंभीरता से सुनने के बाद संबंधित विभागों के पदाधिकारियों को शीघ्र और प्रभावी निस्तारण के स्पष्ट निर्देश दिए। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि जनता से जुड़े मामलों में किसी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि उनकी सरकार आम जनता की समस्याओं के समाधान के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ काम कर रही है। उन्होंने कहा, “यह सरकार गांव की सरकार है। राज्य सरकार द्वारा चलाई जा रही जनकल्याणकारी योजनाएं सीधे लोगों तक पहुंच रही हैं। सभी पात्र लाभार्थी इन योजनाओं का लाभ जरूर लें।”
मुख्यमंत्री से मुलाकात के बाद उपस्थित लोगों ने सरकार की योजनाओं की सराहना की और समस्याएं सुने जाने पर मुख्यमंत्री के प्रति आभार भी जताया।
स्थापना दिवस पर भावुक रहा दुमका
गौरतलब है कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन 2 फरवरी को ही दुमका पहुंचे थे, जहां उन्होंने झारखंड स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में हिस्सा लिया। यह मौका ऐतिहासिक और भावनात्मक दोनों था, क्योंकि पहली बार दुमका में झारखंड स्थापना दिवस दिशोम गुरु शिबू सोरेन की अनुपस्थिति में मनाया गया।
इस समारोह के दौरान मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन सहित झामुमो के कई वरिष्ठ नेता और कार्यकर्ता भावुक नजर आए। कार्यक्रम में दिशोम गुरु को याद करते हुए कई बार माहौल गंभीर और भावनात्मक हो गया। सीएम हेमंत सोरेन ने भी मंच से और मंच के बाहर अपने भाव स्पष्ट रूप से व्यक्त किए।
दुमका से मिल रहा सियासी और प्रशासनिक संदेश
लगातार दूसरे दिन दुमका में मौजूद रहकर मुख्यमंत्री ने साफ संकेत दिया है कि सरकार की प्राथमिकता ग्राउंड लेवल पर शासन और लोगों से सीधा संवाद है। एक ओर जहां स्थापना दिवस के जरिए पार्टी और आंदोलन की विरासत को याद किया गया, वहीं दूसरी ओर जनसुनवाई के जरिए सरकार के कामकाज को जमीन से जोड़ने की कोशिश की गई।
राजनीतिक जानकारों के मुताबिक, दुमका में मुख्यमंत्री की यह सक्रियता सिर्फ प्रतीकात्मक नहीं, बल्कि आने वाले समय में प्रशासनिक फैसलों और योजनाओं के असर को तेज करने की दिशा में एक अहम कदम मानी जा रही है।
