पूर्व विधायक योगेंद्र साव ने निष्पक्ष जांच की मांग की
HAZARIBAGH
केरेडारी थाना क्षेत्र के चट्टी बरियातू में चल रहे शांतिपूर्ण जन आंदोलन को लेकर पूर्व मंत्री योगेन्द्र साव ने मीडिया के समक्ष अपना पक्ष रखा है। उन्होंने आरोप लगाया कि पगार कांटाघर के पास हुई मारपीट की घटना को आंदोलन से जोड़कर जन आंदोलन को बदनाम करने की कोशिश की जा रही है, जबकि सच्चाई इससे बिल्कुल अलग है।
योगेन्द्र साव ने कहा कि जिस स्थान पर मारपीट की घटना हुई, वहां उनकी ओर से चल रहा आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण था और बड़ी संख्या में महिलाएं अपनी जायज मांगों को लेकर धरने पर बैठी थीं। उन्होंने बताया कि इस दौरान महिलाओं के साथ धक्का-मुक्की और दुर्व्यवहार की सूचना भी मिली है, जो बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और चिंताजनक है।
पूर्व मंत्री ने स्पष्ट किया कि धरना-प्रदर्शन की पूरी जानकारी पहले ही अनुमंडल पदाधिकारी सदर को लिखित रूप में दी गई थी। पत्र के माध्यम से विधि-व्यवस्था बनाए रखने और सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग भी की गई थी, इसके बावजूद धरना स्थल या आसपास किसी प्रकार की पुलिस तैनाती नहीं की गई। उन्होंने कहा कि सुरक्षा व्यवस्था में यह चूक कई गंभीर सवाल खड़े करती है, जिनकी निष्पक्ष समीक्षा जरूरी है।
योगेन्द्र साव ने कहा कि पहले से आशंका जताई जा रही थी कि आंदोलन को कमजोर या बदनाम करने के लिए किसी अप्रिय घटना को अंजाम दिया जा सकता है। इसी कारण करबला स्थित धरना स्थल और जोरदाग, झुमरी टाड़ां स्थित उनके आवास परिसर में सीसीटीवी कैमरे लगाए गए थे और उन्हें ऑनलाइन जोड़ा गया था। घटना के समय के सीसीटीवी फुटेज में स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है कि वह धरना स्थल पर आंदोलनकारियों के साथ मौजूद थे और पगार कांटाघर की घटना से पूरी तरह अनभिज्ञ थे।
उन्होंने कहा कि मारपीट से जुड़े वायरल वीडियो में भी यह दिखाई देता है कि घटना को अंजाम देने वाले लोग एक जैसे कंबल ओढ़े हुए थे, जिससे यह आशंका और मजबूत होती है कि यह पूरी घटना सुनियोजित हो सकती है। इस घटना में घायल हाइवा चालक के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करते हुए उन्होंने दोहराया कि उनका आंदोलन किसी भी प्रकार की हिंसा का समर्थन नहीं करता।
पूर्व मंत्री ने जिला प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच कराने, सभी उपलब्ध वीडियो और सीसीटीवी फुटेज को जांच में शामिल करने, सुरक्षा व्यवस्था में हुई चूक की जिम्मेदारी तय करने और धरना स्थल के आसपास पर्याप्त पुलिस बल की तैनाती की मांग की है। उन्होंने कहा कि उनका संघर्ष पूरी तरह लोकतांत्रिक, शांतिपूर्ण और जनहित से जुड़ा है और वह संविधान के दायरे में रहकर अपनी मांगें उठाते रहेंगे।
