NEW DELHI
मशहूर दक्षिण एशियाई पत्रकार, लेखक और ब्रॉडकास्टर मार्क टली का 90 वर्ष की आयु में नई दिल्ली के एक अस्पताल में निधन हो गया। उनके निधन के साथ ही पत्रकारिता के उस दौर का अंत हो गया, जिसने भारत और दक्षिण एशिया को दुनिया के सामने एक अलग नज़रिए से पेश किया।
मार्क टली दशकों तक बीबीसी से जुड़े रहे और भारत में इसके सबसे भरोसेमंद संवाददाताओं में गिने जाते थे। उन्होंने भारत, पाकिस्तान और पूरे उपमहाद्वीप से जुड़ी कई ऐतिहासिक घटनाओं की रिपोर्टिंग की। उनकी पत्रकारिता केवल खबर बताने तक सीमित नहीं थी, बल्कि वह घटनाओं के सामाजिक, राजनीतिक और मानवीय संदर्भ को भी गहराई से सामने लाती थी।
भारत में बीबीसी के ब्यूरो चीफ के तौर पर काम करते हुए मार्क टली ने आम लोगों की ज़िंदगी, उनकी परेशानियों और उम्मीदों को अंतरराष्ट्रीय मंच पर आवाज़ दी। यही वजह थी कि उनकी रिपोर्टिंग को निष्पक्षता, संवेदनशीलता और विश्वसनीयता के लिए जाना जाता था। वे उन चुनिंदा विदेशी पत्रकारों में थे, जिन्हें भारतीय समाज की गहरी समझ थी।
ब्रॉडकास्ट जर्नलिज्म के साथ-साथ मार्क टली एक प्रतिष्ठित लेखक भी थे। उनकी किताबों में भारत के सामाजिक और सांस्कृतिक ताने-बाने के साथ उनका गहरा जुड़ाव साफ झलकता था। उनके लेखन और रिपोर्टिंग में भारत को बाहर से देखने का नहीं, बल्कि भीतर से समझने का प्रयास दिखाई देता था।
मार्क टली के निधन पर देश और दुनिया से श्रद्धांजलि संदेश आ रहे हैं। पत्रकार, लेखक, शिक्षाविद और सार्वजनिक जीवन से जुड़े लोग उन्हें निष्पक्ष पत्रकारिता की एक मजबूत आवाज़ और दक्षिण एशिया को समझने वाला सच्चा कथाकार बता रहे हैं। उनके जाने से पत्रकारिता जगत में एक ऐसी खाली जगह बन गई है, जिसकी भरपाई आसान नहीं होगी।
