समृद्धि यात्रा के दौरान सिवान में नीतीश कुमार का सख्त अंदाज, महिलाओं से बोले, “रुको, सुनोगी तभी तो समझोगी”

SIWAN


बिहार के सिवान में समृद्धि यात्रा के दौरान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार उस वक्त सुर्खियों में आ गए, जब कार्यक्रम के बीच कुछ महिलाएं मंच के सामने से निकलने लगीं। यह देख सीएम ने माइक संभालते हुए कहा, “कहां भाग रही हो तुम लोग, सुनोगी तभी तो जानोगी।” उनके इस बयान के बाद पंडाल में मौजूद लोग ठहर गए और माहौल पूरी तरह मंच पर केंद्रित हो गया।

अपने संबोधन में नीतीश कुमार ने 2005 से पहले और अब के बिहार की तुलना करते हुए कहा कि पहले हालात बेहद खराब थे। शाम होते ही लोग घरों से निकलने में डरते थे, सड़कें टूटी हुई थीं और शिक्षा-स्वास्थ्य की स्थिति चिंताजनक थी। उन्होंने दावा किया कि आज बिहार पूरी तरह बदला हुआ है और विकास की राह पर तेजी से आगे बढ़ रहा है।

मुख्यमंत्री ने महिलाओं की सुरक्षा और सामाजिक सौहार्द का जिक्र करते हुए कहा कि राज्य में अब भाईचारे का माहौल है। पहले सांप्रदायिक तनाव आम बात थी, लेकिन सरकार ने सभी समुदायों के सम्मान और सुरक्षा को प्राथमिकता दी। उन्होंने 2006 से कब्रिस्तानों की घेराबंदी जैसे फैसलों का भी उल्लेख किया।

नीतीश कुमार ने बताया कि शिक्षा, स्वास्थ्य, बिजली और पानी जैसी बुनियादी सुविधाओं पर सरकार ने विशेष ध्यान दिया है। घर-घर नल से जल पहुंचाया गया है और बिजली व्यवस्था में सुधार हुआ है। उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में लोगों का बिजली बिल शून्य आ रहा है और योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाया जा रहा है।

सीएम ने सिवान जिले को मिली विकास योजनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि कई परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं, जबकि कई पर काम जारी है। आरओबी निर्माण और औद्योगिक विकास पर भी तेजी से काम हो रहा है। उन्होंने भरोसा जताया कि आने वाले वर्षों में बिहार और तेज गति से प्रगति करेगा।

कार्यक्रम में उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने भी मंच से सियासी संदेश दिया। उन्होंने कहा कि जैसे उत्तर प्रदेश में राम मंदिर बना है, वैसे ही बिहार में माता सीता का मंदिर बन रहा है। उन्होंने नीतीश कुमार को बिहार को नई दिशा देने वाला नेता बताया और कहा कि सिवान की जनता ने एनडीए पर भरोसा जताया है।

पूरे कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री का जोर महिलाओं को योजनाओं और विकास की जानकारी देने पर रहा। उनका संदेश साफ था कि सरकार के काम को समझने के लिए रुककर सुनना जरूरी है।

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