Khunti
मरांग गोमके जयपाल सिंह मुंडा की 123वीं जयंती के अवसर पर 3 जनवरी को झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा के केंद्रीय वरीय उपाध्यक्ष और आंदोलनकारी नेता देवेंद्रनाथ महतो खूंटी जिले के टकरा गांव पहुंचे। यह गांव जयपाल सिंह मुंडा का पैतृक गांव है। देवेंद्रनाथ महतो ने समाधि स्थल पर श्रद्धांजलि अर्पित कर मरांग गोमके को नमन किया। इसके बाद ग्रामीणों द्वारा आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम, फुटबॉल प्रतियोगिता और श्रद्धांजलि सभा में भी उन्होंने भाग लिया।
इस मौके पर देवेंद्रनाथ महतो ने कहा कि जयपाल सिंह मुंडा शिक्षा, खेल और राजनीति—तीनों क्षेत्रों में शिखर तक पहुंचने वाले व्यक्तित्व थे। सुदूर जंगल-पहाड़ों वाले टकरा गांव से निकलकर उन्होंने ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से शिक्षा ग्रहण की और प्रतिष्ठित आईसीएस परीक्षा पास की। पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने भारतीय हॉकी टीम का गठन किया और यूरोप व ब्रिटेन के कई यूनिवर्सिटी टूर्नामेंट में जीत हासिल की।
उन्होंने कहा कि 1928 के ओलंपिक में भारत को पहला स्वर्ण पदक दिलाकर जयपाल सिंह मुंडा ने देश को गौरवान्वित किया। शिक्षा और खेल के शीर्ष पर पहुंचने के बाद भी वे झारखंड में हो रहे शोषण और लूट को बर्दाश्त नहीं कर सके। इसी कारण उन्होंने झारखंडियों को एकजुट कर अलग राज्य के आंदोलन को दिशा दी और झारखंड पार्टी की स्थापना की।
देवेंद्रनाथ महतो ने कहा कि जयपाल सिंह मुंडा द्वारा पैदा की गई राजनीतिक चेतना का ही परिणाम था कि कांग्रेस लहर के बावजूद आज़ाद भारत के पहले विधानसभा चुनाव में झारखंड पार्टी ने 32 विधानसभा और चार लोकसभा सीटें जीतकर देश को चौंका दिया।
उन्होंने कहा कि अलग झारखंड राज्य जयपाल सिंह मुंडा के संघर्षों का परिणाम है। उनके अमूल्य योगदान के लिए उन्हें भारत रत्न से सम्मानित किया जाना चाहिए और उनके संघर्षपूर्ण जीवन को पाठ्यक्रम में शामिल किया जाना चाहिए।
कार्यक्रम में मनीष कुमार साहू, कुमार ब्रजकिशोर, विक्रम महतो, पवन कुमार, विजय नायक, विश्वकर्मा उरांव, विजय कुमार सिंह, जयंत जायसवाल, बजरंगी कुमार साहू, वीरेंद्र कुमार महतो, गुलशन मुंडा, जॉब कश्यप, प्रकाश नाग, दिलीप तिर्की, कल्याण लिंडा, चैतून कश्यप, मनोज कश्यप, सुमित कश्यप सहित कई गणमान्य लोग और ग्रामीण मौजूद रहे।
