RANCHI
एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) की जांच में अब भाजपा के हजारीबाग सदर विधायक प्रदीप प्रसाद का नाम भी सामने आया है। यह वही मामला है जिसमें एसीबी ने कारोबारी विनय सिंह, आईएएस अधिकारी विनय चौबे समेत कई अफसरों और व्यवसायियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा है।
प्राथमिकी के अनुसार, वन भूमि की अवैध खरीद-बिक्री के दौरान प्रदीप प्रसाद उस रजिस्ट्री दस्तावेज के गवाह थे, जिसके जरिए जमीन का सौदा हुआ। सूत्रों के मुताबिक, विधायक ने भी विनय सिंह की तरह कुछ जमीनें खरीदी हैं। यह भी उल्लेखनीय है कि राजनीति में आने से पहले प्रदीप प्रसाद हजारीबाग के बड़े भूमि कारोबारियों में गिने जाते थे।
एसीबी इस पूरे प्रकरण की जांच कर रही है, जो आईएएस विनय चौबे के हजारीबाग डीसी रहने के दौरान वन भूमि की खरीद-बिक्री और म्यूटेशन में कथित गड़बड़ियों से जुड़ा है। एजेंसी ने इस मामले को कांड संख्या 11/2025 के रूप में दर्ज किया है, जिसमें 70 से अधिक लोगों को नामजद आरोपी बनाया गया है।
कई आरोपितों की गिरफ्तारी हो चुकी है, जबकि कुछ अब भी फरार हैं। दर्ज प्राथमिकी में कहा गया है कि प्रदीप प्रसाद उस रजिस्ट्री डीड के गवाह थे जिसके माध्यम से विनय सिंह और उनकी पत्नी स्निग्धा सिंह ने विवादित वन भूमि की रजिस्ट्री करवाई। इसके बाद जमीन की जमाबंदी अपने नाम कराई और वहां नेक्सजेन शोरूम का निर्माण किया गया।
दस्तावेज के अनुसार, यह रजिस्ट्री 10 फरवरी 2010 को हजारीबाग रजिस्ट्री ऑफिस में की गई थी, जिसकी डीड संख्या 1763/1710, बुक नंबर 1, वॉल्यूम नंबर 45 में पेज 31 से 66 तक दर्ज है।
अब तक इस लैंड स्कैम में एसीबी ने विनय चौबे के करीबी कारोबारी विनय सिंह, लैंड ब्रोकर विजय सिंह, और तत्कालीन सदर अंचल अधिकारी शैलेश कुमार को गिरफ्तार किया है। विनय सिंह की पत्नी स्निग्धा सिंह भी नामजद अभियुक्त हैं।
एसीबी के मुताबिक, जिस भूमि पर विवाद है, वह हजारीबाग सदर अंचल के थाना नंबर 252 में स्थित है। इसमें खाता नंबर 95 के प्लॉट नंबर 1055, 1060, 848 (कुल रकबा 28 डिसमिल) और खाता नंबर 73 के प्लॉट नंबर 812 (72 डिसमिल) शामिल हैं। यह जमीन बभनवे मौजा, हल्का नंबर 11 में आती है।
अब जबकि भूमि घोटाले की जांच तेज़ी पकड़ चुकी है, विपक्ष पर हमला बोल रही भाजपा खुद के एक विधायक के नाम आने से असहज स्थिति में है। अब देखने वाली बात होगी कि पार्टी विधायक प्रदीप प्रसाद के खिलाफ क्या रुख अपनाती है।
