पटना
बिहार में चुनाव आयोग द्वारा जारी की गई अंतिम मतदाता सूची को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। कांग्रेस के बाद अब भाकपा (माले) ने भी इस पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। पार्टी महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य ने आरोप लगाया कि मतदाता सूची से बड़े पैमाने पर महिलाओं के नाम हटा दिए गए हैं, जबकि राज्य में न तो महिलाओं का पलायन हुआ है और न ही मृत्यु दर में कोई असामान्य वृद्धि देखी गई है।
दीपांकर ने कहा कि इस प्रक्रिया में गंभीर खामियां हैं और पार्टी अब इस मुद्दे को सुप्रीम कोर्ट तक ले जाएगी। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग द्वारा विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के बाद प्रकाशित सूची में लिंगानुपात में गिरावट आई है। जनवरी 2025 में लिंगानुपात जहां 914 था, वह अब घटकर 892 पर आ गया है।
उन्होंने यह भी बताया कि जिन लोगों के नाम सूची से हटाए गए हैं, उनकी जानकारी राजनीतिक दलों को अभी तक नहीं दी गई है, जिससे पारदर्शिता पर सवाल खड़े होते हैं।
कांग्रेस भी पहले ही इस मामले में विरोध जता चुकी है। प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम ने कहा कि हटाए गए नामों की संख्या नए जोड़े गए नामों से कहीं अधिक है। पार्टी इस सूची का गहन विश्लेषण करेगी और मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रखेगी।
गौरतलब है कि चुनाव आयोग ने 30 सितंबर को बिहार की विधानसभा चुनाव के लिए अंतिम मतदाता सूची जारी की थी। आंकड़ों के मुताबिक, मतदाता सत्यापन प्रक्रिया के दौरान करीब 69.30 लाख नाम सूची से हटाए गए, जबकि सिर्फ 21.53 लाख नए नाम जोड़े गए हैं। इससे राज्य में कुल मतदाताओं की संख्या घटकर 7.41 करोड़ रह गई है।
इस बीच सुप्रीम कोर्ट ने भी 15 सितंबर को SIR प्रक्रिया की वैधता को लेकर टिप्पणी की थी कि अगर इसमें गड़बड़ी पाई गई तो पूरी प्रक्रिया रद्द की जा सकती है। कोर्ट ने 7 अक्टूबर को इस मामले की अंतिम सुनवाई तय की है।
प्रेस कांफ्रेंस के दौरान दीपांकर भट्टाचार्य ने भागलपुर जिले के पीरपैंती इलाके का दौरा करने के बाद यह भी कहा कि स्थानीय लोग अडानी समूह को जमीन दिए जाने का विरोध कर रहे हैं और सरकार को यह फैसला वापस लेना चाहिए। उन्होंने चेताया कि बिहार में अडानी को रोकना होगा, क्योंकि जनता इसका विरोध कर रही है।
