हेल्थ सेक्टर में मेगा बूस्ट, JPSC करेगा 942 डॉक्टरों की बहाली; कॉलेज से जिला अस्पताल तक भर्ती अभियान

 

मेडिकल कॉलेज से जिला अस्पताल तक भर्ती अभियान, स्वास्थ्य सेवाओं को मिलेगा नया सहारा

RANCHI

झारखंड सरकार ने राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत और आधुनिक बनाने के लिए बड़ा कदम उठाया है। जेपीएससी के माध्यम से 942 डॉक्टरों और फैकल्टी पदों पर नियुक्ति प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। यह पहल राज्य के मेडिकल कॉलेजों और सरकारी अस्पतालों में लंबे समय से खाली पड़े पदों को भरने के लिए की जा रही है।

सरकार ने इस बहाली को चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाने की योजना बनाई है, ताकि चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं दोनों को एक साथ सशक्त किया जा सके।

मेडिकल कॉलेजों में फैकल्टी की नियुक्ति

सरकारी मेडिकल कॉलेजों में पढ़ाई की गुणवत्ता सुधारने के लिए 180 सहायक प्राध्यापकों की नियुक्ति की जाएगी। इनमें 155 पद नियमित और 25 बैकलॉग के हैं। ये नियुक्तियां मेडिसिन, सर्जरी, एनेस्थीसिया, स्त्री एवं प्रसूति रोग और शिशु रोग जैसे अहम विभागों में होंगी।

यह पूरी प्रक्रिया National Medical Commission के मानकों और राज्य की नियमावली के तहत पूरी की जाएगी, जिससे मेडिकल शिक्षा को राष्ट्रीय स्तर के अनुरूप बनाया जा सके।

सुपर स्पेशियलिटी सेवाओं पर जोर

राज्य के प्रमुख मेडिकल कॉलेज धनबाद, जमशेदपुर, हजारीबाग, पलामू और दुमका में 96 सुपर स्पेशियलिटी फैकल्टी की भी नियुक्ति होगी। इनमें न्यूरोसर्जरी, कार्डियोलॉजी, नेफ्रोलॉजी, न्यूरोलॉजी और ऑन्कोलॉजी जैसे क्षेत्रों को प्राथमिकता दी गई है।

इससे गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए मरीजों को दूसरे राज्यों में जाने की जरूरत कम होगी और स्थानीय स्तर पर ही उन्नत चिकित्सा सुविधा मिल सकेगी।

जिला अस्पतालों में डॉक्टरों की बड़ी बहाली

जिला और अनुमंडल अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए 666 विशेषज्ञ डॉक्टरों की नियुक्ति की जाएगी। इनमें 506 नियमित और 160 बैकलॉग पद शामिल हैं। सबसे अधिक पद फिजिशियन और शिशु रोग विशेषज्ञों के हैं।

इसके अलावा 335 चिकित्सा पदाधिकारियों की नियुक्ति प्रक्रिया भी जारी है, जिससे अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी को काफी हद तक दूर किया जा सकेगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस मेगा भर्ती अभियान से झारखंड की स्वास्थ्य व्यवस्था में बड़ा बदलाव आएगा। इससे मरीजों को समय पर बेहतर इलाज मिलेगा और राज्य की स्वास्थ्य सेवाएं राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धी बन सकेंगी।

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