OTT के बढ़ते असर से टीवी सेक्टर में संकट, ढाईसाल में 50 चैनलों ने लौटाए लाइसेंस

जियोस्टार, जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज, ईनाडु टेलीविजन, टीवी टुडे नेटवर्क, एनडीटीवी और एबीपी नेटवर्क जैसे चैनल ने लाइसेंस लौटाये

NEW DELHI

भारत का टेलीविजन ब्रॉडकास्ट सेक्टर तेजी से बदलते दौर से गुजर रहा है। पिछले तीन वर्षों में 50 टीवी चैनलों ने अपने प्रसारण लाइसेंस सरेंडर कर दिए हैं। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के आंकड़ों के हवाले से आई एक रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ है।

रिपोर्ट के मुताबिक, दर्शकों की बदलती आदतें, डिजिटल प्लेटफॉर्म्स का बढ़ता प्रभाव और विज्ञापन से होने वाली आय में गिरावट इसके प्रमुख कारण हैं। जिन प्रमुख मीडिया कंपनियों ने लाइसेंस लौटाए हैं, उनमें जियोस्टार, जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज, ईनाडु टेलीविजन, टीवी टुडे नेटवर्क, एनडीटीवी और एबीपी नेटवर्क जैसे शामिल हैं।

सोनी पिक्चर्स नेटवर्क इंडिया के रूप में कार्यरत कल्वर मैक्स एंटरटेनमेंट ने भी मंत्रालय से एक ही सेट के चैनलों को अपलिंक और डाउनलिंक करने की मंजूरी मिलने के बाद 26 डाउनलिंकिंग परमिशन सरेंडर कर दीं।

पे-टीवी पर बढ़ता दबाव, OTT और फ्री डिश का असर

विशेषज्ञों का कहना है कि भारत का पे-टीवी इकोसिस्टम लगातार दबाव में है। उच्च आय वर्ग के परिवार तेजी से OTT प्लेटफॉर्म्स की ओर शिफ्ट हो रहे हैं, जबकि कीमत को लेकर संवेदनशील दर्शक DD Free Dish का रुख कर रहे हैं। क्रिसिल की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, पेड DTH सब्सक्राइबर बेस वित्त वर्ष 2019 में 72 मिलियन था, जो वित्त वर्ष 2024 में घटकर 62 मिलियन रह गया है। आगे भी इसमें गिरावट की आशंका जताई गई है।

विज्ञापन बाजार में बदलाव

उद्योग के अधिकारियों के मुताबिक, विज्ञापन के कमजोर ट्रेंड्स ने स्थिति को और चुनौतीपूर्ण बना दिया है। WPP के अनुमान के अनुसार, वर्ष 2025 में टेलीविजन विज्ञापन राजस्व में 1.5 प्रतिशत की गिरावट आ सकती है और यह 477.4 बिलियन रुपये पर सिमट सकता है।

इसके विपरीत, कुल विज्ञापन बाजार 2025 में 1.8 ट्रिलियन रुपये तक पहुंचने की संभावना है, जिसमें सालाना 9.2 प्रतिशत की वृद्धि का अनुमान है। वर्ष 2026 तक यह आंकड़ा 2 ट्रिलियन रुपये तक जा सकता है। इसका संकेत है कि विज्ञापन खर्च का बड़ा हिस्सा अब डिजिटल माध्यमों की ओर शिफ्ट हो रहा है।

Enter10 Media ने भी की रणनीतिक कटौती

रिपोर्ट के अनुसार, Enter10 Media ने भी एक रणनीतिक समीक्षा के बाद कुछ लाइसेंस सरेंडर किए हैं। कंपनी ने बिजनेस लक्ष्यों और संसाधन योजना की चुनौतियों के कारण नए चैनल लॉन्च की योजना आगे नहीं बढ़ाने का फैसला किया। इसी प्रक्रिया में दंगल HD और दंगल उड़िया के लाइसेंस छोड़े गए।

उद्योग निकायों का मानना है कि यह बदलाव केवल आर्थिक दबाव का परिणाम नहीं है, बल्कि मीडिया और टेक्नोलॉजी के तेजी से हो रहे एकीकरण का संकेत भी है। दर्शकों के कंटेंट उपभोग के तरीके में आए बदलाव और रेगुलेटरी चुनौतियों ने भी ब्रॉडकास्टिंग सेक्टर में तनाव बढ़ाया है। विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले वर्षों में टीवी और डिजिटल के बीच प्रतिस्पर्धा और तेज हो सकती है, और पारंपरिक ब्रॉडकास्ट मॉडल को नए बिजनेस मॉडल के साथ तालमेल बिठाना होगा।

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