कुड़मी आंदोलन का असर: 15 से अधिक स्टेशनों पर रेलवे ट्रैक जाम, आदिवासी दर्जे की मांग पर प्रदर्शन जारी

20th September 2025

रांची

कुड़मी जाति को आदिवासी (ST) का दर्जा दिलाने की मांग को लेकर शनिवार सुबह से झारखंड के 15 से अधिक स्थानों पर हजारों लोग रेलवे ट्रैक पर बैठ गए हैं। इस वजह से हावड़ा-नई दिल्ली मेन लाइन पर ट्रेन संचालन प्रभावित हुआ है और कई गाड़ियों को रद्द या डायवर्ट करना पड़ा।

रांची के राय, मुरी, टाटीसिल्वे और मेसरा स्टेशनों के पास प्रदर्शनकारी ट्रैक पर कब्जा किए बैठे हैं। वहीं, गिरिडीह, चक्रधरपुर, जामताड़ा, धनबाद और बोकारो के छोटे-बड़े स्टेशनों पर भी बड़ी संख्या में लोग ट्रेनों को रोकने के लिए उतर आए हैं।

धनबाद के प्रधानखंता स्टेशन पर सुरक्षा बलों ने प्रदर्शनकारियों को हटाने का प्रयास किया, जिसके दौरान दोनों पक्षों के बीच झड़प भी हुई। ज्यादातर स्टेशनों पर प्रदर्शनकारी पारंपरिक वेशभूषा और ढोल-मांदर के साथ सुबह से ही ट्रैक जाम कर रहे हैं।

कुड़मी समाज का लक्ष्य झारखंड, पश्चिम बंगाल और ओडिशा के लगभग 100 स्टेशनों पर रेल सेवाएं बाधित करना है, जिनमें झारखंड के करीब 40 स्टेशन शामिल हैं। प्रशासन ने देर रात तक बैरिकेडिंग कर रोकने की कोशिश की, लेकिन आंदोलनकारी सुबह चार बजे से ही स्टेशनों पर पहुंचने लगे।

रेलवे परिचालन पर इसका असर स्पष्ट दिख रहा है। धनबाद मंडल ने हटिया-बर्धमान मेमू (13504) और हटिया-खड़गपुर मेमू (18036) रद्द कर दी हैं। वहीं, धनबाद-अलप्पुझा एक्सप्रेस (13351) का प्रस्थान समय सुबह 11:35 बजे से बदलकर शाम 6:35 बजे कर दिया गया है। रांची-चोपन एक्सप्रेस (18613) को रांची-टोरी मार्ग से डायवर्ट किया गया है।

गिरिडीह के पारसनाथ, बोकारो के चंद्रपुरा और रांची के राय स्टेशन पर ट्रैक जाम होने से अप और डाउन लाइन पर परिचालन गंभीर रूप से प्रभावित हुआ है।

आंदोलन के आयोजकों का कहना है कि यह ‘ऐतिहासिक प्रदर्शन’ है और इसके लिए गांव-गांव में लोगों को जोड़ा गया। रेलवे और प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं। आरपीएफ, जीआरपी और राज्य पुलिस के साथ-साथ सीसीटीवी और ड्रोन निगरानी भी की जा रही है।

अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि रेलवे संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों के खिलाफ सख्ती होगी और नुकसान की भरपाई कराई जाएगी। आजसू पार्टी और झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा के विधायक जयराम महतो ने आंदोलन का समर्थन किया है। जयराम महतो ने वीडियो संदेश में कहा कि यह संघर्ष केवल आदिवासी दर्जे के लिए नहीं है, बल्कि कुरमाली भाषा के सम्मान और जमीन बचाव जैसे मुद्दों के लिए भी है।

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